"आजकल शादियाँ क्यों टूट रही हैं?"

Sunday, July 27th, 2025 in Rushikesh Shivaji Ushir
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आज के समय में तलाक और रिश्तों में दरार आम बात होती जा रही है। पहले जहाँ शादी एक जीवनभर का बंधन मानी जाती थी, अब वह कई बार कुछ सालों या महीनों की बात बनकर रह जाती है। सवाल उठता है – आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या समय बदल गया है या हम बदल गए हैं?

आइए जानते हैं कुछ प्रमुख कारण जिनकी वजह से आजकल शादियाँ टूट रही हैं:


1. संचार की कमी (Lack of Communication)

किसी भी रिश्ते की बुनियाद संवाद पर टिकी होती है। जब पति-पत्नी एक-दूसरे से खुलकर बात नहीं करते, तो गलतफहमियाँ जन्म लेती हैं। धीरे-धीरे ये छोटी बातें बड़ी दीवारें बन जाती हैं।


2. स्वतंत्रता की बढ़ती भावना

आज की पीढ़ी स्वतंत्र विचारों वाली है। महिलाएँ और पुरुष दोनों ही अपने करियर, निजी जीवन और फैसलों में आज़ाद रहना चाहते हैं। कभी-कभी यह स्वतंत्रता टकराव का कारण बनती है जब एक साथी दूसरे पर नियंत्रण जताने की कोशिश करता है।


3. सोशल मीडिया और बाहरी प्रभाव

सोशल मीडिया ने रिश्तों पर गहरा प्रभाव डाला है। वहां दिखने वाली 'परफेक्ट लाइफ' और दूसरों के रिश्तों से तुलना करना अपनी शादी में असंतोष पैदा कर सकता है। साथ ही, ऑनलाइन अफेयर्स के मामले भी बढ़े हैं।


4. धैर्य की कमी

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में लोग जल्दबाज़ हो गए हैं। रिश्तों को निभाने के लिए जो धैर्य और समर्पण चाहिए, उसकी कमी देखी जा रही है। छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते टूट जाते हैं।


5. पारिवारिक हस्तक्षेप और असहज वातावरण

कई बार ससुराल या मायके से अत्यधिक हस्तक्षेप रिश्तों में खटास ला देता है। साथ ही, संयुक्त परिवार में तालमेल न बन पाना भी दूरी का कारण बनता है।


6. भावनात्मक और शारीरिक अपेक्षाएँ

जब एक साथी दूसरे की भावनात्मक ज़रूरतों को नहीं समझ पाता, या आपसी आकर्षण खत्म हो जाता है, तब रिश्ता धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है।


समाधान क्या है?

  • खुले संवाद को बढ़ावा दें

  • एक-दूसरे की आज़ादी और व्यक्तित्व का सम्मान करें

  • समय निकालें, साथ बिताएँ

  • मिलकर समस्याओं का हल निकालें

  • रिश्तों को सोशल मीडिया से न आँकें


निष्कर्ष

 

शादी सिर्फ एक सामाजिक अनुबंध नहीं, बल्कि दो आत्माओं का मिलन है। इसे निभाने के लिए प्यार, समर्पण, समझदारी और धैर्य की ज़रूरत होती है। अगर हम थोड़ा प्रयास करें, तो शायद टूटते रिश्तों को फिर से जोड़ सकें।

 

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Credit: Rushikesh Shivaji Ushir